Naxatra News की खबर का बड़ा असर : टेंडर का खेल उजागर होते ही प्रशासन का एक्शन, डिज्नीलैंड मेला का टेंडर रद्द
नक्षत्र न्यूज द्वारा टेंडर में कथित गड़बड़ी और राजस्व नुकसान के मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद सदर एसडीएम निशांत सिहरा ने नगर भवन परिसर में लग रहे प्रदर्शनी मेले की अनुमति रद्द कर दी है.

Motihari, Jharkhand : नगर भवन मैदान में प्रस्तावित डिज्नीलैंड मेले को लेकर उठे टेंडर घोटाले के आरोपों पर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है. नक्षत्र न्यूज पर खबर प्रमुखता से प्रसारित होने के बाद प्रशासन की ओर से ठोस कदम उठाया गया. खबर प्रसारण के कुछ ही घंटों के भीतर प्रशासन हरकत में आया और विवादों में घिरे टेंडर को रद्द कर दिया गया. साथ ही मेले के आयोजन पर रोक लगाते हुए नगर भवन मैदान को खाली कराने का आदेश भी जारी कर दिया गया है.
जानकारी के अनुसार नगर भवन मैदान में हर वर्ष आयोजित होने वाले डिज्नीलैंड मेले के लिए इस वर्ष भी टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई थी. मेला आयोजन की अनुमति के लिए सदर एसडीओ से आवेदन किया गया था. हालांकि सदर एसडीओ निशांत सिहर ने सुरक्षा, यातायात और जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण कारणों का हवाला देते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया.
एसडीओ ने अपने आदेश में कहा कि नगर भवन मैदान का क्षेत्रफल सीमित है, जहां बड़े पैमाने पर मेले के आयोजन से सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है. इसके अलावा परिसर में सम्राट अशोक की प्रतिमा निर्माण का कार्य भी जारी है, जिससे आयोजन में बाधा उत्पन्न होने की संभावना है. इन परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने तीन दिनों के भीतर मैदान खाली कराने का निर्देश जारी किया.
एसडीओ के आदेश के बाद नगर आयुक्त आशीष कुमार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए डिज्नीलैंड मेले का टेंडर रद्द कर दिया. नगर निगम द्वारा मैदान खाली कराने का पत्र जारी होते ही नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मेले को लेकर चल रहे निर्माण कार्य को रुकवा दिया. प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई से पूरे मामले में हड़कंप मच गया है.
क्या है पूरा टेंडर विवाद?
नगर भवन मैदान में डिज्नीलैंड मेले के आयोजन के लिए हर वर्ष खुली निविदा प्रक्रिया अपनाई जाती है. आरोप है कि पिछले वर्ष जिस टेंडर की दर करीब 1 लाख 75 हजार रुपये प्रतिदिन थी, उसी मेले का टेंडर इस वर्ष मात्र 32 हजार रुपये प्रतिदिन के हिसाब से दे दिया गया. इस भारी अंतर को लेकर नगर निगम को लाखों रुपये के राजस्व नुकसान की आशंका जताई गई.
पूर्व वार्ड पार्षद मणि भूषण श्रीवास्तव ने इस मामले को उठाते हुए टेंडर प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं और संभावित मिलीभगत के आरोप लगाए थे. उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी.
मामले के तूल पकड़ने और सार्वजनिक चर्चा का विषय बनने के बाद प्रशासन ने तत्काल संज्ञान लेते हुए टेंडर प्रक्रिया को ही रद्द कर दिया. अब पूरे प्रकरण की जांच की संभावना जताई जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि टेंडर राशि में इतना बड़ा अंतर आखिर किन परिस्थितियों में आया.
फिलहाल नगर भवन मैदान में किसी भी प्रकार के मेले के आयोजन पर रोक लगा दी गई है. आगे की कार्रवाई प्रशासनिक जांच और रिपोर्ट के आधार पर तय की जाएगी.
(मोतिहारी से प्रतीक सिंह की रिपोर्ट)
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