Kharg Island Attack: ईरान की मुख्य भूमि से लगभग 50 किलोमीटर दूर फारस की खाड़ी में स्थित आठ किलोमीटर लंबा मूंगे का द्वीप खर्ग द्वीप पर भारी बमबारी की गई है. ईरान का लगभग सारा तेल निर्यात इसी द्वीप से होकर गुजरता है और अमेरिका-इजराइल सैन्य अभियान की शुरुआत से लेकर अब तक ईरान में लगभग 5,000 ठिकानों को निशाना बनाए जाने के बावजूद खार्ग द्वीप अब तक सुरक्षित था.
अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा -
खर्ग द्वीप पर स्थित सैन्य ठिकाने "मध्य पूर्व के इतिहास में सबसे शक्तिशाली बमबारी हमलों में से एक" में "पूरी तरह से नष्ट" कर दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि उन्होंने फिलहाल द्वीप पर तेल अवसंरचना को निशाना न बनाने का फैसला किया है.
रॉयटर्स द्वारा उद्धृत अधिकारियों के अनुसार, खर्ग द्वीप पर केवल "सैन्य ठिकानों" को निशाना बनाया गया था और अमेरिकी नौसेना जल्द ही होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) से टैंकरों को "सुरक्षा प्रदान करना" शुरू करेगी.
“हमारे हथियार दुनिया के सबसे शक्तिशाली और अत्याधुनिक हथियार हैं, लेकिन नैतिकता के कारण मैंने द्वीप पर मौजूद तेल अवसंरचना को नष्ट न करने का निर्णय लिया है. हालांकि, अगर ईरान या कोई और होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों के निर्बाध और सुरक्षित आवागमन में बाधा डालने का प्रयास करता है, तो मैं तुरंत इस निर्णय पर पुनर्विचार करूंगा,”.
खर्ग द्वीप का महत्व
खार्ग द्वीप निस्संदेह ईरान का सबसे संवेदनशील आर्थिक लक्ष्य है, जो उसकी अर्थव्यवस्था और तेल राजस्व में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. यहां विशाल तेल भंडारण सुविधाएं हैं, और द्वीप से पाइपलाइनें समुद्र के रास्ते ईरान के कुछ सबसे बड़े तेल और गैस क्षेत्रों से जुड़ी हुई हैं.
द्वीप के तेल बुनियादी ढांचे पर बमबारी से ईरान के दैनिक कच्चे तेल के निर्यात का 90% हिस्सा ठप हो जाएगा और पहले से ही बढ़ती तेल कीमतों में भारी उछाल आएगा.
यही कारण है कि विनाशकारी अमेरिकी-इजरायल हमलों के दौरान निर्यात टर्मिनल अछूता रहा. लेकिन भले ही नवीनतम हमले में तेल बुनियादी ढांचे को निशाना नहीं बनाया गया है, फिर भी कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की संभावना है.
“ईरान के किसी भी बड़े तेल एवं गैस उत्पादन या निर्यात संयंत्र पर अब तक हमला नहीं हुआ है. मेरा मानना है कि तेल की कीमतों को स्थिर करने के उद्देश्य से यह जानबूझकर उठाया गया कदम है. यह आंशिक रूप से ईरान को यह संकेत देने का प्रयास है कि वह अन्य देशों के संयंत्रों पर हमला करने से परहेज करे – जिसे उसने अब तक ठुकरा दिया है. यह आंशिक रूप से युद्ध के बाद के दिनों में ईरानी जनता को अपने पक्ष में रखने का भी एक उपाय है, क्योंकि तेल एवं गैस उत्पादन और निर्यात करने की ईरान की क्षमता ही उसकी अर्थव्यवस्था के पुनरुद्धार का आधार होगी,” हमले से कुछ दिन पहले एक जहाजरानी विशेषज्ञ ने मीडिया को बताया.
खर्ग द्वीप पर ईरानी तेल मंत्रालय के तीन प्रमुख ऊर्जा अवसंरचना स्थल स्थित हैं, जिनमें फलात ईरान ऑयल कंपनी भी शामिल है, जो प्रतिदिन 5 लाख बैरल कच्चे तेल का उत्पादन करती है और देश की चार प्रमुख तेल उत्पादक रिफाइनरियों में सबसे बड़ी मानी जाती है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस द्वीप पर खर्ग पेट्रोकेमिकल कंपनी के साथ-साथ तेल और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस के भंडारण और परिवहन के लिए एक प्रमुख संयंत्र भी स्थित है.
खर्ग द्वीप की भौगोलिक स्थिति इसे इतना महत्वपूर्ण क्यों बनाती है?
खर्ग वह स्थान है जहां ईरान के मध्य और पश्चिमी तेल क्षेत्रों से आने वाली पाइपलाइनें समाप्त होती हैं. अमेरिकी तेल कंपनी (एमोको) द्वारा स्थापित इस द्वीप को 1979 की क्रांति के दौरान ईरान ने अपने कब्जे में ले लिया था. एमोको अब भी बीपी के स्वामित्व में ईंधन ब्रांडों का विक्रय करती है.
खर्ग ईरान के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि देश के अधिकांश तट इतने उथले हैं कि बड़े कच्चे तेल वाहक जहाज वहां नहीं पहुंच सकते. खर्ग गहरे पानी के करीब है और इसके पूर्वी तट पर जेटी बनी हुई हैं. इससे बड़े तेल टैंकरों को वहां आसानी से डॉक करने में मदद मिलती है.






