Sudan संघर्ष से जुड़े आरोपों पर भारत की कंपनी समेत आठ लोगों और संस्थाओं पर अमेरिका का बड़ा प्रतिबंध
Sudan संघर्ष से जुड़े आरोपों पर भारत की कंपनी समेत आठ लोगों और संस्थाओं पर अमेरिका का बड़ा प्रतिबंध
अमेरिका ने सूडान में जारी गृहयुद्ध से जुड़े कथित आपूर्ति नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए भारत की एसबीएल एनर्जी लिमिटेड और उसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी आलोक चौधरी सहित कुल आठ व्यक्तियों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि इन लोगों और कंपनियों ने ऐसे विस्फोटकों की आपूर्ति में भूमिका निभाई, जिनका उपयोग सूडान में चल रहे सशस्त्र संघर्ष के दौरान किया गया।
अमेरिकी वित्त विभाग के अनुसार, यह कार्रवाई उन अंतरराष्ट्रीय नेटवर्कों को निशाना बनाने के उद्देश्य से की गई है, जिनके माध्यम से युद्ध में शामिल पक्षों तक हथियारों और विस्फोटक सामग्री की आपूर्ति होने का संदेह है। वाशिंगटन का कहना है कि ऐसे नेटवर्क संघर्ष को लंबा खींचने और हिंसा को बढ़ावा देने में सहायक बन रहे हैं।
सूडान में लंबे समय से सेना और रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (आरएसएफ) के बीच भीषण संघर्ष जारी है। इस युद्ध के कारण लाखों लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं, जबकि बड़ी संख्या में नागरिकों की जान जा चुकी है। संयुक्त राष्ट्र सहित कई अंतरराष्ट्रीय संगठन पहले ही इस संकट को गंभीर मानवीय आपदा बता चुके हैं।
अमेरिका ने यह प्रतिबंध अपने कार्यकारी आदेश 14098 के तहत लगाए हैं। इसके तहत सूचीबद्ध व्यक्तियों और संस्थाओं की अमेरिकी अधिकार क्षेत्र में आने वाली संपत्तियों को फ्रीज किया जाएगा। साथ ही अमेरिकी नागरिकों, कंपनियों और वित्तीय संस्थानों को इनके साथ किसी भी प्रकार का आर्थिक या व्यावसायिक लेनदेन करने की अनुमति नहीं होगी।
हालांकि, एसबीएल एनर्जी लिमिटेड या उसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी की ओर से इस कार्रवाई पर तत्काल कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अमेरिका का कहना है कि उसका उद्देश्य उन वैश्विक नेटवर्कों को कमजोर करना है, जो युद्धग्रस्त क्षेत्रों तक संवेदनशील सामग्री पहुंचाकर संघर्ष को और अधिक गंभीर बना सकते हैं। यह कदम सूडान में हिंसा कम करने और जिम्मेदार लोगों पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
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