गढ़वा में लगातार बढ़ रही भू-माफियाओं की सक्रियता, भूमि विवादों को प्राथमिकता से निपटाए जिला प्रशासन- JMM
गढ़वा जिले में भू-माफियाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है. कुछ लोग संगठित समूह बनाकर और महिलाओं को आगे कर जमीन पर जबरन दावा करने या उसे विवादित बनाने का प्रयास करते हैं.

Garhwa / Jharkhand (Report By- Atul Dubey): जिले में बढ़ते भूमि विवादों और भू-माफियाओं की सक्रियता पर चिंता व्यक्त करते हुए झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय सदस्य एवं मीडिया पैनलिस्ट धीरज दुबे ने जिला प्रशासन से ऐसे मामलों के त्वरित और निष्पक्ष निपटारे की मांग की है. उन्होंने कहा कि भूमि विवाद केवल राजस्व संबंधी समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह धीरे-धीरे कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द के लिए भी चुनौती बनता जा रहा है.
धीरज दुबे ने कहा कि गढ़वा जिले में भू-माफियाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है. कुछ लोग संगठित समूह बनाकर और महिलाओं को आगे कर जमीन पर जबरन दावा करने या उसे विवादित बनाने का प्रयास करते हैं. इसका उद्देश्य वास्तविक भूमि मालिकों पर मानसिक और सामाजिक दबाव बनाकर उनकी जमीन को कम कीमत पर खरीदना होता है. ऐसे मामलों में गरीब और कमजोर वर्ग के लोग सबसे अधिक प्रभावित होते हैं.
उन्होंने कहा कि भूमि अभिलेखों के ऑनलाइनकरण के दौरान हुई त्रुटियों का खामियाजा आज भी आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है. रघुवर दास सरकार के कार्यकाल में तत्कालीन मुख्य सचिव राजबाला वर्मा के नेतृत्व में भूमि रिकॉर्ड को ऑनलाइन करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी. हालांकि इस प्रक्रिया का उद्देश्य पारदर्शिता लाना था, लेकिन कई तकनीकी और प्रशासनिक गलतियों के कारण अनेक भूमि विवाद उत्पन्न हो गए. कई मामलों में एक व्यक्ति की जमीन दूसरे के नाम दर्ज हो गई, जिससे वर्षों पुराने स्वामित्व विवाद खड़े हो गए. इन विवादों के कारण कई जगह तनाव और हिंसक घटनाएं भी सामने आईं.
धीरज दुबे ने आरोप लगाया कि जिले में भूमि कारोबार अब एक संगठित व्यवसाय का रूप ले चुका है. भूमि की बढ़ती कीमतों को देखते हुए कई लोग अवैध तरीके से जमीन के सौदों में शामिल हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि कुछ भू-माफियाओं को राजनीतिक संरक्षण भी प्राप्त है. उनके अनुसार, पिछले चुनावों के दौरान कई भूमि कारोबारियों ने विभिन्न प्रत्याशियों को आर्थिक सहयोग दिया था और अब बदले में उन्हें संरक्षण मिलने की चर्चा आम है. ऐसे माहौल में आम नागरिकों के लिए न्याय प्राप्त करना कठिन हो जाता है.
उन्होंने कहा कि गढ़वा नगर परिषद से सटे पंचायत क्षेत्रों में भूमि विवाद सबसे अधिक देखने को मिल रहे हैं. शहरीकरण के विस्तार और जमीन के बढ़ते बाजार मूल्य के कारण इन क्षेत्रों में अवैध कब्जा, फर्जी दस्तावेज और स्वामित्व विवाद के मामले बढ़े हैं. यदि समय रहते इन मामलों का समाधान नहीं किया गया तो यह भविष्य में बड़े अपराधों और सामाजिक संघर्ष का कारण बन सकता है.
धीरज दुबे ने जिला प्रशासन से मांग की कि भूमि विवादों के निपटारे के लिए विशेष अभियान चलाया जाए. विवादित जमीनों की जांच के लिए जरूरत के अनुसार विशेष शिविर लगाए जाएं तथा राजस्व, निबंधन और पुलिस विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए. उन्होंने कहा कि समयबद्ध कार्रवाई और पारदर्शी जांच से आम लोगों का विश्वास प्रशासन में मजबूत होगा तथा भूमि विवादों को अपराध का रूप लेने से रोका जा सकेगा. उन्होंने प्रशासन से इस दिशा में गंभीर और प्रभावी पहल करने की अपील की.
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