'सुप्रीम कोर्ट से जीते, पर सिस्टम से हार रहे युवा!', JAP-1 ग्राउंड में दिनभर भटके झारखंड कांस्टेबल भर्ती के 888 अभ्यर्थी
झारखंड कांस्टेबल भर्ती 2015 के 888 सफल अभ्यर्थी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जॉइनिंग के लिए JAP-1 पहुंचे, लेकिन दिनभर इंतजार के बाद दोबारा फिजिकल टेस्ट की बात सामने आई।

झारखंड में सरकारी नौकरी पाना और उस तक पहुंचना किसी लंबी और थकाऊ जंग को जीतने से कम नहीं है। अगर आप सुप्रीम कोर्ट से भी जीत जाएं, तो भी ये सिस्टम आपको आसानी से कुर्सी तक नहीं पहुंचने देता। कुछ ऐसा ही हाल झारखंड कांस्टेबल भर्ती 2015 के सफल अभ्यर्थियों का हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बाद ये युवा खुशी-खुशी अपनी जॉइनिंग की उम्मीद लिए उपस्थिति दर्ज कराने पहुंचे थे, लेकिन वहां उनके साथ जो हुआ, उसने सबको हैरान और परेशान कर दिया है।
सुबह से शाम हो गई, पर किसी ने नहीं ली सुध
सुप्रीम कोर्ट से बड़ी जीत मिलने के बाद सैकड़ों सफल अभ्यर्थी अपनी हाजिरी लगाने के लिए रांची के जैप-1 (JAP-01) ग्राउंड पहुंचे थे। इन युवाओं की आंखों में एक उम्मीद थी कि अब सालों का इंतजार खत्म होगा और उन्हें उनकी हक की नौकरी मिलेगी। लेकिन ग्राउंड पर पहुंचने के बाद उन्हें सुबह से लेकर शाम तक बस खड़ा रखा गया। पूरा दिन बीत जाने के बाद भी अधिकारियों ने उनकी उपस्थिति दर्ज नहीं की। दिनभर भूखे-प्यासे भड़कने के बाद उलटे उन्हें यह कहकर वापस भेज दिया गया कि अब वे अगले दिन आएं। सिस्टम के इस टालमटोल वाले रवैये ने अभ्यर्थियों को बुरी तरह निराश कर दिया है।
अब एक और नए टेस्ट का टेंशन, सीधे सीएम से लगाई गुहार
इन युवाओं का दर्द सिर्फ दिनभर इंतजार करने तक सीमित नहीं है। उन्हें अधिकारियों की तरफ से एक ऐसा अजीबोगरीब फरमान सुनाया गया है, जिसने उनकी रातों की नींद उड़ा दी है। अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्हें अगले दिन बुलाकर दोबारा शारीरिक दक्षता यानी फिजिकल टेस्ट देने को कहा जा रहा है। यह बात युवाओं के गले से नीचे नहीं उतर रही है, क्योंकि वे भर्ती की ये सारी प्रक्रियाएं और टेस्ट सालों पहले ही सफलता के साथ पास कर चुके हैं। अब जब वे सब कुछ क्लियर कर चुके हैं, तो दोबारा फिजिकल टेस्ट का दबाव क्यों बनाया जा रहा है? नियुक्ति में हो रही इस नई आनाकानी से त्रस्त होकर इन युवाओं ने सीधे सूबे के मुख्यमंत्री से इंसाफ की गुहार लगाई है।
आखिर सुप्रीम कोर्ट का वो ऐतिहासिक आदेश क्या था?
आपको बता दें कि यह पूरा मामला साल 2015 की झारखंड कांस्टेबल भर्ती से जुड़ा हुआ है, जो एक लंबे समय से कानूनी दांव-पेच में अटका था। हाल ही में 3 जून 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 888 अभ्यर्थियों के चेहरे पर मुस्कान लाते हुए एक बहुत बड़ी राहत दी थी। न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने राज्य सरकार और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) को साफ निर्देश दिया था कि इन 888 अभ्यर्थियों के दावों पर उपलब्ध खाली पदों के हिसाब से दोबारा विचार किया जाए।
इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट ने इन युवाओं की नियुक्ति की मांग को खारिज कर दिया था। लेकिन इन जिद्दी युवाओं ने हार नहीं मानी और सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दायर कर दी। देश की सबसे बड़ी अदालत में वकील वात्सल्य विग्या ने इन युवाओं का पक्ष बड़ी मजबूती से रखा था, जिसके बाद उन्हें यह ऐतिहासिक जीत नसीब हुई थी। अब देखने वाली बात यह होगी कि सुप्रीम कोर्ट से जीत चुके इन युवाओं की इस नई परेशानी पर सरकार और प्रशासन कब जागता है।
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