सरकारी रेट और थोक कीमत के बीच इतना बड़ा फर्क क्यों? रिटेलरों ने खोली थोक विक्रेताओं की ‘पोल’?
यूरिया की सरकारी दर 266 रुपये प्रति बोरी है, लेकिन पहाड़पुर के रिटेल विक्रेताओं का आरोप है कि उन्हें थोक विक्रेताओं से खाद 280 से 300 रुपये में मिल रही है। शिकायत के बाद अब कृषि विभाग की कार्रवाई पर नजर है।


मोतिहारी : जिले में यूरिया की किल्लत और कथित कालाबाजारी पर प्रशासन की कार्रवाई के बीच अब उर्वरक विक्रेताओं और थोक विक्रेताओं के बीच टकराव सामने आ गया है। पहाड़पुर प्रखंड के रिटेल उर्वरक विक्रेताओं ने थोक विक्रेताओं और कृषि विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए जिला कृषि पदाधिकारी के समक्ष शिकायत दर्ज कराने पहुंचे।
रिटेल विक्रेताओं का आरोप है कि सरकार ने किसानों के लिए यूरिया की बिक्री दर 266 रुपये प्रति बोरी निर्धारित कर रखी है। निर्धारित दर से अधिक कीमत पर यूरिया बेचने वाले दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा रही है। लेकिन दूसरी ओर, उन्हें थोक विक्रेताओं से यही यूरिया 280 से 300 रुपये प्रति बोरी तक में उपलब्ध कराया जा रहा है।
खरीद ही महंगी तो 266 रुपये में बिक्री कैसे?
विक्रेताओं का कहना है कि इसके अलावा एक बोरी पर करीब 20 रुपये तक ढुलाई खर्च भी वहन करना पड़ता है। ऐसे में सवाल यह है कि जब रिटेल दुकानदार को ही यूरिया सरकारी बिक्री दर से अधिक कीमत पर मिलेगी, तो वह किसानों को 266 रुपये में यूरिया कैसे उपलब्ध कराएगा?
उर्वरक संघ के अध्यक्ष चंदेश्वर सिंह और सचिव महेश्वर सिंह ने कहा कि रिटेल दुकानदारों को थोक विक्रेताओं द्वारा महंगे दाम पर यूरिया उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके बावजूद रिटेलरों पर सरकारी निर्धारित दर पर ही यूरिया बेचने का दबाव बनाया जा रहा है। संघ के पदाधिकारियों का आरोप है कि रिटेल विक्रेताओं पर कार्रवाई करने से पहले यह भी देखा जाना चाहिए कि उन्हें यूरिया किस कीमत पर उपलब्ध कराया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि रिटेलरों को निर्धारित और उचित कीमत पर उर्वरक उपलब्ध कराया जाए तो वे भी किसानों को सरकारी दर पर यूरिया बेचने के लिए तैयार हैं।
अब सवाल थोक विक्रेताओं की कीमत पर
अब पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकारी रेट ₹266 है तो रिटेल दुकानदारों तक यूरिया ₹280 से ₹300 में कैसे पहुंच रही है? यदि रिटेलर महंगे दाम पर खरीदने का आरोप लगा रहे हैं, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है और थोक स्तर पर कीमतों की निगरानी कौन कर रहा है?
रिटेल उर्वरक विक्रेताओं की शिकायत के बाद अब निगाहें जिला कृषि विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यूरिया की कीमत बढ़ने के पीछे जिम्मेदार कड़ी पर कार्रवाई जरूरी होगी, ताकि किसानों को निर्धारित दर पर खाद मिल सके और कालाबाजारी पर वास्तविक नकेल कसी जा सके।
(मोतिहारी से प्रतीक सिंह की रिपोर्ट)

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