लेवी वसूलते ग्रामीणों ने पकड़ा था, अब जेल में मिला शव!, चतरा मंडल कारा में बंदी की संदिग्ध मौत
चतरा मंडल कारा में आर्म्स एक्ट मामले में करीब दो साल से बंद मंटू गंझू की संदिग्ध मौत हो गई। शव का मजिस्ट्रेट और मेडिकल बोर्ड की निगरानी में पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।

Chatra News : चतरा मंडल कारा से एक बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आई है, जहां आर्म्स एक्ट के मामले में पिछले दो वर्षों से बंद कथित उग्रवादी मंटू गंझू उर्फ दिलेश ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद से जेल प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था में भारी हड़कंप मच गया है। आनन-फानन में जेल कर्मियों द्वारा उसे फंदे से उतारकर इलाज के लिए चतरा सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक मूल रूप से पलामू जिले के मनातू थाना क्षेत्र का निवासी था और करीब दो साल से न्यायिक हिरासत में जेल में बंद था।
मजिस्ट्रेट और मेडिकल बोर्ड की निगरानी में पोस्टमार्टम प्रक्रिया
घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन की सीधी निगरानी में शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। इसके लिए एक विशेष मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया है। पोस्टमार्टम बोर्ड में दंडाधिकारी (मजिस्ट्रेट) के रूप में हंटरगंज के अंचल अधिकारी रितिक कुमार को प्रतिनियुक्त किया गया है। इसके अलावा मेडिकल टीम में सदर अस्पताल के वरीय चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अजहर, डॉ. बिनय मेहता और डॉ. शैलेन्द्र कुमार शामिल हैं, जिनकी मौजूदगी में पूरी वीडियोग्राफी के साथ पोस्टमार्टम की प्रक्रिया संपन्न कराई जा रही है।
बिरहोर आवास निर्माण में लेवी मांगने पर ग्रामीणों ने था पकड़ा
मिली जानकारी के अनुसार, मंटू गंझू चतरा जिले के कुंदा थाना क्षेत्र अंतर्गत हिंदिया कला गांव में बन रहे बिरहोर आवास निर्माण स्थल पर कथित तौर पर लेवी (रंगदारी) वसूलने और ग्रामीणों को धमकाने गया था। उस दौरान स्थानीय ग्रामीणों ने एकजुटता और साहस का परिचय देते हुए उसे अवैध हथियार के साथ रंगे हाथों पकड़ लिया था और कुंदा थाना पुलिस के सुपुर्द कर दिया था। पुलिस ने तब आर्म्स एक्ट व अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर उसे जेल भेज दिया था, जहां वह विचाराधीन कैदी के रूप में बंद था।
प्रशासन की चुप्पी, परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप
जेल के अंदर बंदी की मौत के बाद जहां जेल प्रशासन और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी फिलहाल आधिकारिक तौर पर कुछ भी बयान देने से बच रहे हैं, वहीं मृतक के परिजनों ने जेल प्रबंधन की सुरक्षा और कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। परिजनों का आरोप है कि जेल प्रशासन की घोर लापरवाही के कारण यह घटना घटी है और उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय व निष्पक्ष जांच की मांग की है। अब मजिस्ट्रेट जांच और मेडिकल बोर्ड की विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद ही मौत की वास्तविक परिस्थितियों और वजहों का खुलासा हो सकेगा।
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