डिजिटल फ्रॉड पर RBI का बड़ा फैसला, पीड़ितों को मिलेगी आर्थिक राहत
डिजिटल फ्रॉड पर RBI का बड़ा फैसला, पीड़ितों को मिलेगी आर्थिक राहत

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल भुगतान के दौरान होने वाली धोखाधड़ी से ग्राहकों को राहत देने के लिए नए ग्राहक सुरक्षा नियमों की घोषणा की है। थर्ड अमेंडमेंट डायरेक्शंस, 2026 के तहत अब पात्र उपभोक्ताओं को छोटी राशि की ऑनलाइन ठगी होने पर अधिकतम 25,000 रुपये तक का मुआवजा मिल सकेगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य डिजिटल लेनदेन को अधिक सुरक्षित बनाना और साइबर अपराध के पीड़ितों को आर्थिक सहायता प्रदान करना है।
नई व्यवस्था 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होगी और शुरुआत में इसे एक वर्ष के पायलट कार्यक्रम के रूप में लागू किया जाएगा। यह नियम केवल उन इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन पर लागू होगा, जो इस तिथि के बाद किए जाएंगे। मुआवजे की राशि वास्तविक वित्तीय नुकसान के 85 प्रतिशत या 25,000 रुपये, जो भी कम होगा, तक सीमित रहेगी। यह सुविधा केवल उन मामलों में मिलेगी, जिनमें कुल नुकसान 50,000 रुपये तक हो। साथ ही, इस योजना का लाभ किसी व्यक्ति को जीवन में केवल एक बार मिलेगा।
इस बार नियमों का दायरा भी बढ़ाया गया है। अब केवल बैंकिंग प्रणाली में तकनीकी सेंध से जुड़े मामलों ही नहीं, बल्कि फर्जी कॉल, नकली डिजिटल गिरफ्तारी, ओटीपी साझा कराने या अन्य सोशल इंजीनियरिंग तरीकों से हुई ऑनलाइन ठगी भी इसके अंतर्गत शामिल होगी।
मुआवजा प्राप्त करने के लिए पीड़ित को घटना के पांच दिनों के भीतर अपने बैंक के साथ-साथ राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल या 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करानी होगी। यदि बैंक यह साबित नहीं कर पाता कि ग्राहक ने जानबूझकर धोखाधड़ी में सहयोग किया, तो पात्र दावे का निपटारा निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य डिजिटल बैंकिंग पर लोगों का भरोसा बढ़ाना और ऑनलाइन वित्तीय अपराधों के प्रभाव को कम करना है।
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