'जॉइनिंग के दो महीने बाद छीनी नौकरी!', प्रोजेक्ट भवन से हटाए गए फूड सेफ्टी ऑफिसर्स अब कूटे मैदान में देंगे धरना
झारखंड सरकार द्वारा प्रतियोगी परीक्षाएं और नियुक्तियां रद्द किए जाने के फैसले के खिलाफ राजधानी रांची में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।

JSSC-CGL Protest: झारखंड सरकार द्वारा प्रतियोगी परीक्षाएं और नियुक्तियां रद्द किए जाने के फैसले के खिलाफ राजधानी रांची में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रोजेक्ट भवन (सचिवालय) के मुख्य गेट के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे खाद्य सुरक्षा पदाधिकारियों (Food Safety Officers) को प्रशासन ने वहां से हटा दिया है। प्रशासन द्वारा प्रोजेक्ट भवन के बाहर लगे टेंट को हटाए जाने के बाद सभी प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी बिना किसी टकराव के शांतिपूर्ण तरीके से वहां से हटने को राजी हो गए और अब वे कूटे मैदान में अपना आंदोलन जारी रखेंगे।
कूटे मैदान में JSSC-CGL अभ्यर्थियों के साथ करेंगे आंदोलन
प्रशासनिक निर्देश के बाद चयनित अभ्यर्थी अब सीधे कूटे मैदान का रुख कर रहे हैं। गौरतलब है कि कूटे मैदान में JSSC-CGL के प्रभावित अभ्यर्थी पहले से ही डटे हुए हैं और धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे में अब खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी के पद से हटाए गए अभ्यर्थी भी उनके साथ मिलकर सरकार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करेंगे। ज्ञात हो कि खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी के कुल 56 पदों के विरुद्ध 54 अभ्यर्थियों का अंतिम रूप से चयन हुआ था, लेकिन सरकार के ताजा फैसले से इन सभी की नौकरी एक झटके में चली गई है।
'दो महीने नौकरी करने के बाद अचानक कर दिया बेदखल'
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि वे किसी पिछले दरवाजे से नहीं, बल्कि सरकार द्वारा निर्धारित कठिन और पारदर्शी चयन प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पास करके चयनित हुए थे। चयन के उपरांत सरकार ने उन्हें बाकायदा नियुक्ति पत्र सौंपा और सभी ने अपने-अपने पदों पर विधिवत योगदान भी दे दिया था। लेकिन सेवा में आने के महज दो महीने बाद ही पूरी प्रक्रिया को अचानक रद्द कर दिया गया, जिससे उनके सामने आजीविका और भविष्य का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
पुरानी नौकरियां छोड़कर आए थे अभ्यर्थी, परिवारों पर टूटा आर्थिक संकट
आंदोलित अभ्यर्थियों ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि झारखंड में सरकारी नौकरी मिलने के भरोसे कई अभ्यर्थियों ने अपनी पुरानी अच्छी-भली नौकरियां छोड़ दी थीं और यहां योगदान दिया था। अब अचानक सेवा समाप्त किए जाने से उनके सामने दोबारा रोजगार तलाशने और परिवार चलाने की विकट चुनौती खड़ी हो गई है। अभ्यर्थियों ने व्यक्तिगत और पारिवारिक स्तर पर बड़े वित्तीय फैसले लिए थे, जो अब भारी आर्थिक संकट में तब्दील हो चुके हैं।
'दोषियों को सजा मिले, लेकिन निर्दोषों की नौकरी न छीनी जाए'
अभ्यर्थियों ने राज्य सरकार से पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की पुरजोर मांग की है। उनका दो टूक कहना है कि यदि परीक्षा या चयन प्रक्रिया के किसी स्तर पर कोई अनियमितता हुई है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी जांच एजेंसियों और धांधली करने वालों पर तय होनी चाहिए। मेहनती और निर्दोष सफल अभ्यर्थियों को इसकी सजा देना सरासर अनुचित है। अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री से मामले में सीधे हस्तक्षेप कर सेवा बहाली या न्यायसंगत समाधान निकालने की अपील की है और साफ चेतावनी दी है कि इंसाफ मिलने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

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