TMC में नेतृत्व को लेकर घमासान, बागी गुट ने ममता और अभिषेक को हटाने का किया दावा
नई राष्ट्रीय कार्यसमिति गठित, आधिकारिक टीएमसी ने बागियों के फैसले को बताया असंवैधानिक

पश्चिम बंगाल की सियासत में तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी अंदरूनी खींचतान नए मोड़ पर पहुंच गई। पार्टी के बागी गुट ने एक विशेष बैठक में संगठन के शीर्ष नेतृत्व में बदलाव का दावा करते हुए कहा कि पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी अब उनके गुट का नेतृत्व नहीं करेंगे। इसके साथ ही 30 सदस्यीय नई राष्ट्रीय कार्यसमिति के गठन की घोषणा की गई।
बैठक में विधायक अरूप रॉय को नई कार्यसमिति का अध्यक्ष बनाया गया, जबकि कई वरिष्ठ नेताओं को उपाध्यक्ष, महासचिव और कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई। बागी नेताओं का तर्क है कि पार्टी संविधान के अनुसार निर्धारित अवधि के भीतर राष्ट्रीय कार्यसमिति का पुनर्गठन नहीं होने के कारण नया संगठन बनाना आवश्यक हो गया था। हाल के दिनों में विधानसभा के भीतर नेतृत्व, संगठनात्मक फैसलों और कथित हस्ताक्षर विवाद को लेकर बढ़े मतभेदों ने पार्टी में असंतोष को और गहरा कर दिया। बागी गुट का दावा है कि उसे बड़ी संख्या में विधायकों और पूर्व जनप्रतिनिधियों का समर्थन प्राप्त है।
हालांकि, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले आधिकारिक तृणमूल कांग्रेस खेमे ने इन सभी दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। पार्टी का कहना है कि ममता बनर्जी ही तृणमूल कांग्रेस की निर्विवाद अध्यक्ष हैं और अभिषेक बनर्जी अपने अधिकृत पद पर बने हुए हैं। आधिकारिक नेतृत्व ने बागी बैठक को असंवैधानिक बताते हुए कहा कि समानांतर संगठन बनाने या शीर्ष नेतृत्व को हटाने का अधिकार किसी भी गुट के पास नहीं है। पार्टी ने संकेत दिया है कि अनुशासनहीनता में शामिल नेताओं के खिलाफ आगे भी कार्रवाई की जाएगी।
इस घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह विवाद केवल संगठनात्मक स्तर तक सीमित रहता है या आने वाले समय में राज्य की राजनीतिक दिशा को भी प्रभावित करता है।
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